छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज दुर्ग इकाई ने ऑनलाइन विवाद समाधान योजना का किया स्वागत

दक्षिणापथ, दुर्ग। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश सांखला एवं पवन बड़जात्या, मोहम्मद अली हिरानी, राजा कांकरिया, दर्शन लाल ठाकवानी, कमल जैन, राकेश सकलेचा, रवि केवलतानी, एवं चेंबर टीम ने बताया कि आनलाईन विवाद समाधान प्रक्रिया इस नये दौर की मांग और जरुरत है, इससे व्यापारी वर्ग वर्ग को भी काफी लाभ मिलेगा, एक आंकड़ों के मुताबिक देश में सालाना 1.6 करोड़ मामले अदालतों में पहुंचते हैं। इनमें से 8 लाख बैकलॉग में चलते रहते हैं।साथ ही देश में अदालती मामलों का निपटारा भी लंबा काम होता है। यहां औसतन एक विवाद के निपटारे में औसतन 1445 दिनों का समय लगता है। जो आर्थिक सहयोग और विकास संगठन देशों में सुलझाए जाने वाले मामलों के मुकाबले 6 गुना होता है। वहीं चीन के मुकाबले 3 गुना होता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यही नहीं देश में अदालती मामलों में वादी के एक बार पहुंचने पर होने वाला औसत खर्चा 497 रुपये है। वहीं वादी को रोजाना होने वाली औसत आय का नुकसान 844 रुपये होता है।
जहां भारत जैसे देश में जहां 20 फीसदी आबादी की बचत 500 रुपये से नीचे है, ये व्यवस्था बहुत महंगी साबित होती है।
इसी कड़ी में सांखला ने बताया कि नीति आयोग भी मानता है कि अगर कानूनी विवादों को इस नई व्यवस्था के जरिए सुलझाया जाएगा तो न सिर्फ समय बचेगा बल्कि होने वाले खर्च में भी कमी आ सकेगी।
सांखला ने बताया कि अदालतों में लंबा इंतजार और बड़ा खर्च कम करने के उद्देश्य से नीति आयोग ने शनिवार को ऑनलाइन विवाद समाधान पुस्तिका का विमोचन किया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने इसका शुभारंभ किया है। आयोग के मुताबिक मौजूदा तकनीक के दौर में देश में विवादों के समाधान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की तरफ बढ़ना बेहद जरूरी हो गया है। चेंबर के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश सांखला ने कहा कि इसके जरिए न सिर्फ लोगों को होने वाले अदालती खर्चों को घटाया जा सकता है बल्कि विवाद में होने वाले नुकसान और लगने वाले लंबे समय की भी बचत हो सकेगी। सांखला ने कहा कि ऑनलाइन विवाद समाधान व्यवस्था में लोगों को नए तकनीक के जरिए न्याय दिलाने की अपार संभावनाएं हैं। वहीं, उनके मुताबिक इसके जरिए देश में विवादों को सुलझाने का एक बेहतर सिस्टम बनाया जा सकेगा। नीति आयोग ने 86 पन्ने की हैडबुक में सभी हितधारकों के सुझावों और रिसर्च के जरिए मौजूदा अदालती हालात बताने के साथ साथ इस नई व्यवस्था के जरिए उसे कैसे बदला जा सकता है ये भी बताने की कोशिश की गई है।

आइए समझते है क्या है नई व्यवस्था?
ऑनलाइन विवाद समाधान या ओडीआर, डिजिटल प्रौद्योगिकी और विवाद समाधान की वैकल्पिक तकनीकियों का उपयोग करते हुए अदालतों के बाहर छोटे और मध्यम दर्जे के विवादों को निपटाने की एक व्यवस्था है। इसमें मध्यस्थता और बीच-बचाव के उपाय किए गए हैं। न्यायपालिका के प्रयासों के चलते जहां अदालतों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, ऐसे में प्रभावी, स्केलेबल और विवादों की रोकथाम तथा समाधान के लिए साझेदारी की व्यवस्था जरूरी हो जाती है।
सांखला ने कहा कि इस कोरोना काल में खासकर लाकडाउन में खड़े देश में ओडीआर विवादों के प्रभावी और सस्ते समाधान की दिशा में मददगार हो सकती है, ये आनलाइन विवाद समाधान प्रक्रिया ! छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज दुर्ग इकाई एवं दुर्ग सराफा व्यापारी संघ ने इस योजना का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सभी वर्गो को समाधान निपटाने में आसानी होगी एवं खर्च , समय भी कम लगेगा।

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