स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते हाटस्पॉट बने रसमड़ा के स्वास्थ्य केंद्र में तालाबंदी की स्थिति

दक्षिणापथ, रसमड़ा। एक तरफ वैश्विक महामारी कोरोना लोगों की जान ले रही है तो वही स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से कंटेनमेंट जोन बने कोरोना हाटस्पॉट ग्राम रसमड़ा में जागरूक ग्रामीणों व स्थानीय जनप्रतिनिधि प्रशासनिक लापरवाही से नाराज हो रहे हैं और ग्रामीणों में आक्रोश पैदा हो रहा है। आपको बता दें कि रसमड़ा में लगभग 10 अप्रैल तक 112 के करीब कोरोना पॉजिटिव मरीज है और वही एक युवक की 3 दिन पहले मौत भी हो चुकी है। 100 टेस्ट में लगभग 55 के अनुपात में कोरोना मरीज मिल रहे हैं उसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है दक्षिणापथ में प्रकाशित खबर के चलते टेस्ट के लिए की व्यवस्था हुई थी लेकिन इस बार स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ज्योत्सना भारती को ही दूसरे अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया है वहीं एक और डॉक्टर की दूसरे जगह पर तैनाती का आदेश आ गया है जिसकी वजह से स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक पुरुष स्वास्थ्यकर्ता के भरोसे है। रसमड़ा कंटेनमेंट जोन होने के साथ-साथ औद्योगिक नगरी वाला क्षेत्र है जहां दिनभर मजदूरों की आवाजाही लगी रहती है। उसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की लापरवाही समझ से परे है।
जहां जांच के लिए बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए वहां प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। ग्रामीण जनों ने कहा कि जब मरीज के अनुरूप यहां डॉक्टर ही नहीं है तो आखिर स्वास्थ्य केंद्र की आवश्यकता ही क्या है एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र को छोड़ दिया गया है। जबकि सैकड़ों की संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र का क्या होगा भीड़ बढ़ेगी तो कोरोना और बढ़ेगा उससे अच्छा तालाबंदी सही रहेगा। जनपद सदस्य अजय वैष्णव ने बताया कि ग्रामीण जन भी लापरवाही बरत रहे हैं पॉजिटिव मरीज भी खुले में घूम रहे हैं। मितानिनों की टीम बनाकर सिमप्टम वाले मरीजों की पड़ताल की जा रही है। स्वास्थ्य केंद्र कोमा में है प्रशासन इस स्वास्थ्य केंद्र के प्रति गंभीर नहीं है। ग्रामीणों की बहुत दिन से शिकायत रही है इंडस्ट्रियल क्षेत्र से लगातार निकलने वाले धुएं के प्रदूषण से खांसी की समस्या हो रही है जिसके चलते भी लोग बीमार पड़ रहे हैं।

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