चाहे सुख हो या दुख हो खुद रोकर हमेशा दूसरों को हंसाते हैं कलाकार, फिल्म एक कलाकार बता रही है लॉकडाउन की परेशानी

  • प्रशांत कुमार क्षीरसार. दक्षिणापथ

भिलाई. भिलाई. फिल्म ‘एक कलाकार लॉकडाउन की परेशानी’ में बताया गया है कि एक स्टूडियो में ऑडिशन होता है एक लड़का दो लड़को को बोलता है जिसे कला का ज्ञान नहीं होता वे सब आपने आप को साबित करना चाहता है। फिर वे दोनों ऑडिशन के लिए चले जाते हैं जहां फिर एक के बाद एक करके ऑडिशन देते हैं। पर जो वहां ऑडिशन ले रहा होता उसे सिर्फ पैसो से मतलब होता है। उनके लिए छत्तीसगढ़ में आज का कमाने का जरिया बना लिए है। कम बजट में मूवी फिल्म बनाना और जिसके पास पैसा है वही हीरो है। फिल्म में हो या एक अलबम, क्यों न ऐसा दौर है फिर दोनों लड़के पैसे के तलाश में सोच में रहते है।

वे दोनों दोनों आपने दादा यानी बबा को पैसे के लिये बोलते है कि हमें पैसा चाहिए। उसके दादा बोलते है कि जो कुछ है सब तुम लोग का ही है, फिर भी बताओ की क्या करोंगे इन पैसों का। दोनों आपने हीरो बनने की इच्छा बताते है। जिस पर उनके दादा उसे समझाते है कि पहले उनके दादा स्वयं भी कलाकार थे। किसी ने कोई साथ नहीं दिया, दुनिया, सगा-संबंधी क्या बोले उन्होंने बताया कि सब बोलते है एक दर्द है। एक कलाकर के लिए लॉकडाउन में उसका दर्द सरकार कुछ नहीं किया उसका तकलीफ है वीडियो में बताया गया है।

स्टोरी गोविंदा विश्वकर्मा की है जिसमें एक्टिंग भी गोविंदा विश्वकर्मा ने की है। एडिट महमाया स्टूडियो आरंग से और इसे डायरेक्टर हरीश साहनी ने किया है और कैमरामेन हरीश साहनी जी है। जैसी वीडियो झुमरू छत्तीसगढिय़ा एक कलाकार लॉक डाउन की परेशानी वीडियो 15 मिनट की फिल्म एक्टर गोविंद विश्वकर्मा , डायरेक्टर हरीश साहनी, कैमरामैन हरीश साहनी, स्टोरी गोविंद विश्वकर्मा पूरे एक्टिंग की है। गोविंद विश्वकर्मा ने एडिटिंग में महत्वपूर्ण भूमिका महामाया स्टूडियो आरंग रायपुर ने निभाई है। गोविंद विश्वकर्मा अच्छे कलाकार है और बखूबी ईमानदारी से अपना अभिनय किया है।

कई फिल्मों, एल्बम और गाना में डांस और शानदार नृत्य कलाकार भी करते हैं। कला के क्षेत्र में महारत है गोविंद विश्वकर्मा फिल्म फैंस प्रशंसक फिल्म समीक्षक प्रशांत कुमार क्षीर सागर एक कलाकार के लिए लॉक डाउन की परेशानी कलाकार किस परेशानी से गुजर ना पड़ता है। कलाकारों ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि आम इंसान की तरह नहीं होता है। कलाकार एक खास इंसान की तरह होता है क्योंकि हर परिस्थिति में हंसकर जीता है। संघर्ष करता है कलाकार का एक सपना होता है चाहे वह सुख हो या दुख हो खुद रो कर हमेशा दूसरों को हंसाते हैं। हर महान कलाकार को रुपया पैसा से ज्यादा अपनी इज्जत प्यारी होती है। सच्चे कलाकार को किसी भी चीज का घमंड नहीं होता है सिर्फ प्यार और सम्मान का भूखा होता है वह कलाकार आम इंसान एक खास होता है गोविंद विश्वकर्मा जी यही संदेश देना चाहते हैं।

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