कोरोना का खौफ… खिड़की से घुस, एक पैर पर खड़े हो मुंबई से गोरखपुर के लिए निकल पड़े, प्रवासी मजदूरों का पलायन भी शुरू

मुंबई
महाराष्ट्र में कोरोना की बढ़ती रफ्तार ने जहां सरकार की चिंता बढ़ाई है, वहीं लॉकडाउन की आहट से प्रवासी मजदूरों में डर देखने को मिल रहा है। कंधे पर बैग, मुंह पर मास्क, रुमाल बांधे, खिड़की से घुसने की जद्दोजहद, ट्रेनों की खिड़कियों से झांकते कई चेहरे। मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर गोरखपुर जाने वाले ट्रेन में लोगों की भीड़ डर की एक अलग ही कहानी कह रही है। मुंबई में शनिवार और रविवार को पूर्ण लॉकडाउन का आदेश दिया गया है। हालात पिछले साल की तरह हो रहे हैं, ऐसे में प्रवासी मजदूरों का पलायन भी शुरू हो चुका है।

​एक ट्रेन में 1400-1500 यात्री हो रहे रवाना

-1400-1500-

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार के अनुसार इन ट्रेनों में से 42 से 45 ट्रेनें रोजाना उत्तर भारत के लिए जाती हैं। सरकार की मौजूदा गाइडलाइंस के हिसाब से प्रत्येक ट्रेन में 1400-1500 यात्री जा रहे हैं, जबकि सामान्य परिस्थितियों में ये आंकड़ा 3 हजार तक भी पहुंचता है क्योंकि वेटिंग टिकट वाले यात्री भी सफर करते हैं।

​कोरोना के बढ़ रहे केस, जा रहे हैं गांव

मुंबई में लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर पहुंचे एक पैसेंजर ने कहा कि यह ट्रेन गोरखपुर जा रही है। यहां कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। इसलिए हम अपने गांव लौट रहे हैं।

​उत्तर भारत के लिए दर्जनभर ट्रेनें

मध्य रेलवे के अलावा करीब दर्जन भर ट्रेनें पश्चिम रेलवे से उत्तर भारत के लिए चल रही हैं। इस प्रकार करीब 80 हजार लोग ट्रेनों से और अन्य लोग सड़क के रास्ते ही अपने गांव के लिए निकलने लगे हैं।

​कहीं फिर से ना लग जाए लॉकडाउन

लॉकडाउन खत्म होने के बाद जैसे ही फैक्ट्रियां व अन्य व्यावसायिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट रही थीं, अचानक फिर से मामलों की तेजी ने तस्वीर को बिल्कुल पलट दिया है। हालात पिछले साल की तरह हो रहे हैं, ऐसे में प्रवासी मजदूरों का पलायन भी शुरू हो चुका है। प्रवासी मजदूर मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों से फिर से पलायन करने को मजबूर हैं। कहीं अचानक लॉकडाउन ना लग जाए इस डर से लोग एक बार फिर से किसी भी तरह से अपने घरों को लौटना चाहते हैं।

​ट्रेन टिकट नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

नायगांव में हाइवे पर स्थित एक होटल में काम करने वाले सूरज कुमार जायसवाल ने बताया कि हाइवे के लगभग सभी होटल बंद हो गए हैं। सूरज अपने मूल गांव भदोही जाना चाहते हैं, लेकिन ट्रेन की टिकट नहीं मिलने से उसकी परेशानी और बढ़ गई है। सूरज दो बार नालासोपारा स्टेशन जाकर कंफर्म टिकट के लिए लाइन में लगे लेकिन नाकामी हाथ लगी।

​ट्रेन की तुलना में बस का किराया 3 से 4 गुना अधिक

बिस्सी चलाने वाले शाबिर शेख बताते हैं कि इस समय मुलुक जाने के लिए रेलवे टिकट घर से टिकट मिलना बहुत मुश्किल है| इसके कारण एजेंटो से टिकट लेना पड़ रहा है| एजेंट भी पैसा लेने के बाद आसानी से टिकट नहीं दे रहे हैं| उन्होंने बताया कि साकेत एक्स्प्रेस ट्रेन से प्रयागराज जाने के लिए एजेंट द्वारा एक टिकट का 1300 से 1500 रुपया लिया जा रहा है।

​कोरोना ने तोड़ दी कमर…डर लग रहा है

अखिलेश ने कहा कि कोरोना ने कमर तोड़ दी है। जैसे- तैसे गाड़ी पटरी पर आ रही थी। लेकिन अचानक कोरोना के मामले शहर में बढ़ने लगे और सरकार ने कई प्रतिबंध लगा दिए। पिछले साल के अनुभवों से डर लग रहा है। इसलिए परिवार के अन्य सदस्य भी चाहते हैं कि गांव वापस चले जाएं। कई बार प्रयास करने के बाद भी ट्रेन का कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा है।

​लॉकडाउन खत्म होने के बाद लौटे थे वापस, फिर बिगड़ रहे हालात

कृष्ण कुमार भाईंदर पूर्व की एक फैक्ट्री में काम करते है। वे बताते है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद वे काम करने के लिए वापस आ गये थे लेकिन अब स्थिति फिर से बिगड़ रही है। लॉकडाउन के भय से कृष्णा यूपी स्थित अपने गांव जा रहे है। भाईंदर पूर्व में एक स्टील कारखाना चलाने वाले मनीष यादव बताते है कि पिछले 7-8 दिनों से रोजाना 400 से 500 लोग अपने गांव की तरफ जा रहे है।

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