इसलिए लॉक डाउन है जरूरी

दक्षिणापथ, दुर्ग। लॉक डाउन से मुझे क्या फायदा? और मुझे कितना नुक़सान? इससे व्यक्ति बाहर नहीं आ पा रहा है ,एक दुकानदार लक्षण पता चलने से यदि टेस्ट करवाता है या किसी पाज़िटिव के संपर्क में आने के बाद टेस्ट करवाता है और पॉजिटिव आता है तो उसे दुकान बंद करके रखना पड़ेगा। यही वजह है की लक्षण दिखने पर या किसी पॉजिटिव के संपर्क में आने पर वह ओवरकॉन्फिडेंस में रहता है कि मुझे नहीं हो सकता ।तब तक वह कई लोगों को संक्रमित कर चुका होता है और जब परिस्थिति कंट्रोल से बाहर हो जाती है तब वह हॉस्पिटल पहुंचता है। देर से अस्पताल पहुंचने से बीमारी बढ़ जाती है और कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है । यही कारण है कि कोरोना से मौतें अधिक हो रही है , यदि लोग सावधानी बरतें तो इतना नहीं फैलता और समय पर अस्पताल पहुंचते तो इतनी मौतें नहीं होती । लगभग साल भर से अधिक हो गया कोरोना से कैसे बचा जा सकता है,, कोरोना की कोई दवाई नहीं है सावधानी ही इससे बचने का उपाय है , उसके बाद भी लोगों को समझ में नहीं आ रहा है तो क्या करें ,? किसको दोष दें ? सरकार भी क्या करें? घर में रहना है, भीड़ भाड़ वाली जगह पर नहीं जाना है, इसे कितनी बार और बताया जाए। क्या सरकार लाक डाउन लगाकर कड़ाई करके डंडा लेकर दौड़ाये तभी लोग समझेंगे? सरकार ने अभी रायपुर में 10 दिन के लिए लॉक डाउन लगाया है पर इन 10 दिनों में क्या कोरोनावायरस खतम हो जायेगा? कोरोना से सावधानी पहले भी रखना था, अभी रखना चाहिए और भविष्य में भी रखना होगा। लोगों को समझाइश देने के लिए अभी लाकडॉउन का डिसीजन अच्छा है पर यह स्थाई हल नहीं है।

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