जंगल से निकला नक्सलियों का झुंड और शुरू कर दी गोलीबारी… गांव के लोगों की जुबानी, बीजापुर नक्सली हमले की कहानी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर तेकुलागुडेम गांव के पास सुरक्षाबलों के एक दल पर नक्सलियों द्वारा घात लगाकर हमला करने के बाद शनिवार को स्थानीय लो घर छोड़कर बाहर चले गए थे। हालांकि अब वे फिर वापस लौटने लगे हैं। लौट रहे लोगों ने बताया कि किस तरह उन्हें बंदूक के बल पर नक्सलियों ने घर छोड़कर भागने के लिए मजबूर किया गया था।

न्यूज एजेंसी एएनआई को एक ग्रामीण क्यू रमेश ने बताया, “नक्सलियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच गोलाबारी हुई थी। हम डर गए थे।हमारे पास भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। गांव के ही मेरे कई दोस्त अभी भी डरे हुए हैं।”

उन्होंने कहा, “हम सभी अपने ट्रकों पर सवार हो गए और पास के एक गांव में चले गए। जिन्होंने गांव नहीं छोड़ा उन्हें नक्सलियों ने पुलिस को फोन करने पर धमकी दी। पुलिस ने नक्सलियों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए हमारी पिटाई की। हम वापस आ गए हैं और अपनी दैनिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।”

एक अन्य ग्रामीण जो कि छात्र है, ने बताया, “जब सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में आ रहे थे, तो हम सभी डर गए और भाग गए। हम खतरे को भांप सकते थे और मिनटों बाद नक्सलियों का एक झुंड पास के जंगलों से सामने आया और गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने भी फायरिंग शुरू कर दी। यही कारण है कि हम सभी ने भागने का फैसला किया।”

उन्होंने कहा, “अब हम घर वापस आ गए हैं। लौटने पर हमें रास्ते में नक्सलियों के कई शव दिखाई दिए। अधिकारी फिर पहुंचे और शवों को ले गए।”

आपको बता दें कि शनिवार को सुकमा-बीजापुर सीमा पर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए।  इस हमले में 31 जवान घायल हो गए थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि मुठभेड़ चार घंटे चली और सुरक्षाबलों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रवेश किया और बहादुरी से लड़े।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक कुलदीप सिंह, जो हमले के बाद की स्थिति की निगरानी करने के लिए छत्तीसगढ़ में हैं, ने रविवार को कहा कि ऑपरेशन के बारे में कोई खुफिया जानकारी नहीं थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हमले पर शोक व्यक्त किया और हर संभव सहायता की पेशकश की।

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