नि:शुल्क पेसमेकर जांच शिविर, 137 मरीजों ने उठाया लाभ

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Ro No. 12059/86



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दक्षिणापथ, रायपुर। आखिरकर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन के लिहाज से बड़े फैसले ले लिये हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के जिलों को कोविड पाजीटिविटिव के आधार पर दो श्रेणियों में बांट कर सामान्य प्रशासन विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश संभागायुक्त को जारी किया है। जिन जिलों में कोविड सकारात्मक दर 4 प्रतिशत से ऊपर होने पर स्कूल, कालेज, आंगनबाड़ी केंद्र, प्ले स्कूल आदि बंद कर दिए जाएंगे। साथ ही सभी पुस्तकालयों, स्वीमिंग पुल, जिम, क्लब समेत ऐसे अन्य स्थानों पर भी तालाबंदी कर दी जाएगी। पहली श्रेणी के इन जिलों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कफर््यू लगा दिया जाएगा। इसी तरह दूसरी श्रेणी के जिलों में पाजिटिविटी दर पर ध्यान दिए बिना जुलूस्र, रैलियों, सभाओं, सार्वजनिक सभाओं, सामाजिक (विवाह व अंत्येष्टि को छोड़कर)सांस्कृतिक, धार्मिक खेल आदि सामूहिक आयोजनों पर प्रतिबंध हेतु धारा 144 महामारी अधिनियम जरूरत के हिसाब से जारी कर दिए जाएंगे। सिनेमा, होटल व अन्य व्यवसायों पर चैँबर की बैठक लेकर एक तिहाई की दर पर चलाने का प्रयास किया जाएगा। कोविड की दर यदि 4 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई तो तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी जाएगी। राज्य की सड़क सीमा व रेलवे स्टेशनों पर रेंडम चेकिंग की जाएगी। जरूरत पडऩे पर माइक्रो या मिनी कंटेंटमेट जोन बनाए जा सकेंगे। सभी सार्वजनिक स्थल, बाजार व दुकानों में मास्क की अनिवार्यता सख्ती से लागू करायी जाएगी। बैठकों के लिए विडियों कांफ््रेस सुविधा को बढ़ाया जाएगा। यद्यपि छत्तीसगढ़ में अभी कोरोना की भीषण स्थिति नहीं बनी है, किंतु यहंा भी केस तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार ओमीक्रोन छोटे बच्चों को तेजी से संक्रमित करता है। डेल्टा के मुकाबले इसके संक्रमण की रफ्तार 15 गुणा तेज है। ओमीक्रोन के अलावा डेल्टा वैरिएंट के केस भी लगातार आ ही रहे हैं। पिछले साल छत्तीसगढ़ में कोविड पाजीटिविटिव रेट अभी से भी कम थी। किंतु होली गुजरते-गुुजरते एवं अप्रैल आते-आते सब कुछ गड़बड़ा गया। कोरोना की दूसरी लहर ने देश, दुनिया व समाज पर जितना कहर ढाया, उसे दशकों तक नहीं भुला जा सकता। सरकारी स्कूल के पालक चिंतित ओमीक्रोन के साये चल रहे जिले के स्कूलों ने पालकों की चितां बढ़ा दी है। देश के अन्य राज्यों में जिस तरह से स्कूली बच्चे लगातार संक्रमित हो रहे हैं, उससे पालकों की चिंता वाजिब भी है। छत्तीसगढ़ के स्कू ल शिक्षा विभाग ने ओमीक्रोन से निपटने के ऐहतियातिक उपाय भी सरकारी स्कूलों में शुरू नहीं किए हैं। किसी दिन कोरोना विस्फोट की स्थिति बड़ी कठिनाई सामने आ सकती है। खासतौर पर प्रायमरी स्कूलों में बच्चों के पास न मास्क है, और न सेनेटाइजर की उचित व्यवस्था। यहंा तक सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं हो रहा है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में पचास फीसदी उपस्थिति जैसे कोई सर्कुलर भी जारी नहीं किए हैं। ऐसे में गांव के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले गरीब बच्चों का भगवान ही मालिक है। मालूम हो कि देश के मुंबई, चेन्नई, बैंगलुरू समेत कई अन्य शहरों में ओमीक्रोन के बढऩे के चलते स्कूलों में 31 जनवरी तक अवकाश घोषित कर दिए गए हैं।