केवल कागजों पर सिमट कर रहा गया प्रशासन का आदेश, धरातल पर नहीं हो रहा साकार, देखें कैसे उड़ गई कोविड-19 नियमों की धज्जियां, खुल गई प्रशासन के दावों की पोल

दक्षिणापथ,दुर्ग। प्रशासनिक दावे महज औपचारिक होते हैं धरातल पर उतर कर देखने से ही सच्चाई का पता लगता है। कागज पर तो जिले के मुखिया आदेश जारी कर देते है लेकिन उसे धरातल पर साकार करने की जिम्मेदारी निचले तबके के अधिकारियों की होती है। लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हो और प्रशासन के दावे की पोल खुलने लगती है तो जिम्मेदार चुप्पी साध लेते हैं। प्रशासन के आदेश केवल कागजों पर ही दिखते हैं हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

दरअसल 29 सितंबर को दुर्ग जिले के कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने एक आदेश जारी किया था जारी आदेश में खंड बनाकर 4 बिंदुओं पर लाइन लिखी थी जिसमें दर्शाया गया था कि सार्वजनिक स्थानों पर मार्कस्पेस खबर नहीं पहनने की स्थिति में 100 रुपये, हमको रनटाइम के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में 1000 रुपये, सार्वजनिक स्थलों पर थूकते हुए पाए जाने की स्थिति में 100 रुपये व दुकानों व्यावसायिक संस्थाओं के मालिकों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग फिजिकल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन किए पाए जाने की स्थिति में 200 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। इसके आगे और लिखा था कि यदि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा जुर्माना देने से इनकार किया जाता है तो संबंधित के विरुद्ध एपिडेमिक डिसीजेज एक्ट 197 यथा संशोधित 2020 सहपाठी छत्तीसगढ़ एपिडेमिक डीसीजेज कोविड-19 रेगुलेशन 2020 के रेगुलेशन 14 एवं भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 188 अधीन संबंधित पुलिस थाना में एफ आई आर दर्ज कराई जावे। यदि किसी दुकान व्यवसायिक संस्था में दूसरी बार उल्लंघन पाया जाता है तो उक्त दुकानदार व्यवसाय संस्थान को आगामी 15 दिवस के लिए फील किया जावेगा यह आदेश 1 अक्टूबर को प्रातः 5:00 बजे से प्रभावशील होगा।
आपको बता दें कि लॉक डाउन खुलने के बाद गुरुवार को दुर्ग जिला मुख्यालय के साइंस कॉलेज में छात्र सैकड़ों की संख्या में असाइनमेंट जमा करने पहुंचे। जहां कोविड-19 नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थी। उन्हीं छात्रों में से किसी ने एक वीडियो तैयार किया और उसे सोशल मीडिया में वायरल करते हुए प्रशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी।
आज प्रशासन के इस आदेश के बावजूद आज भी लोग बिना मास्क लगाए के घूम रहे हैं और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। खास बात यह है कि शासकीय दफ्तरों में ही कोविड-19 नियमों की धज्जियां उड़ती देख रही है जिसके बाद लोगों के जहन से सवाल उठने लगे हैं कि शासकीय दफ्तरों में ही कोविड-19 नियमों का पालन नहीं हो रहा है तो एक सामान्य स्थान में संभावना ही नहीं है। जब प्रशासन के आदेश केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गए और दावे की पोल खुलने लगी तो प्रशासनिक अधिकारी भी पल्ला झाड़ने में लग गए हैं और लोगों में जागरूकता नहीं होने की बात कह रहे हैं। जिम्मेदारों की स्थिति हरकतों के कारण ही आज जिले में लगातार कोरोना का संक्रमण बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। अगर प्रशासनिक अधिकारी ही इसी तरह पल्ला झाड़ते रहे तो शायद ही कोरोना का चैन टूटेगा और कोरोना के खतरे से बचा जा सकता है।

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