क्या कोरोना के नाम पर चल रहा कोई बड़ा खेल!?!

दक्षिणापथ, दुर्ग। क्या कोरोना के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में कोई बड़ा खेल चल रहा है। शहरी व ग्रामीणजनों में आजकल यह चर्चा खूब चल रहा है कि कोरोना के नाम पर ऊपरी स्तर में जमकर धांधली चल रहा है। लोग कहने लगे है कि कोरोना से कमाई के गोरखधंधे में बड़े बड़े लोग शामिल है। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही है। कोरोना की आशंका पर किसी मरीज को कोविड सेंटर में दाखिल करा दिया जाता है, और उसी दिन महज एक आधारकार्ड के आधार पर कुछ घण्टो में आयुष्मान योजना का कार्ड बना लिया जाता है। 4-5 दिन रखने के बाद मरीजों को बिना टेस्ट किये अस्पताल से छुट्टी भी दे दिया जाता है। अस्पताल से वापस घर लौटे कथित मरीज बताते हैं कि दो चार दवा देने के अतिरिक्त ऐसा कोई ट्रीटमेंट नही मिला, जिससे खुद को कोरोना संक्रमित होने का भान हो, साथ मे यह भी अहसास हो कि हमने कोरोना पर विजय पा ली, और स्वस्थ होकर अब घर जाने योग्य हो गए हो।
इसमें सच्चाई कितनी है, यह पुख्ता तौर पर तो कोई नही बता सकता। मगर लोगो मे इस तरह की बातें बड़े स्तर पर चल रही है कि जब से कोरोना को आयुष्मान योजना के तहत इलाज के दायरे में लाया गया है तब से छत्तीसगढ़ में कोरोना के मामले में तीव्र इजाफा हुआ है। लोगों का कहना है कि प्रत्येक कोरोना मरीज के पीछे केंद्र सरकार लाख रु से ऊपर तक खर्च करने राशि दे रही है, उसी राशि का बंदरबांट करने कतिपय जिम्मेदार लोग कुछ दूजे किस्म का खेल खेलने लगे है।
दरअसल कोरोना से महज 4-5 दिन में ठीक होकर वापस लौटे मरीजो को अस्पताल वाले सिर्फ यह कहकर घर वापस भेज रहे है कि वे 14 दिनों तक कवारेंटीन में रहे, उसके बाद वे मरीज की कोई खबर नही ले रहे है और न इसकी निगरानी कर रहे है कि मरीज सच मे आइसोलेट है या नहीँ? लोगो की नजर में स्वास्थ्य विभाग का यह रवैया विभाग को ही संशय में डाल रहा है। इधर अस्पताल से घर लौटे मरीज शहर व गांव में बेधड़क घूम रहे है और लोगो को यह बता रहे है कि कोरोना कोई बड़ी बीमारी नही है। दो-चार गोलियों में मरीज ठीक हो जाते है। कुछ मरीज कहते है कि टेस्ट कराने के बाद लक्षण नही होने पर भी उन्हें कोरोना पोसिटिव बताकर कोविड अस्पताल में भर्ती कर दिया गया, और कुछ ही दिनों में ठीक हो गए हो कहकर घर भेज दिया गया।
बहरहाल, लोगो मे चल रही बातों की सच्चाई में कितना दम है यह बताने वाला तो कोई नही, किंतु कोरोना और इसके इलाज को लेकर विविध किस्म की गहरी भ्रांति जरूर फैल गई है।

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