कुपोषण दूर करने स्तनपान के महत्व पर चर्चा करने के लिए वेबिनार का आयोजन, मां के दूध से नहीं फैलता कोविड संक्रमण, शिशु की इम्म्युनिटी बढ़ाने के लिए अमृत है मां का दूध

-कोविड संक्रमित माता भी करा सकती है स्तन पान
-शिशु के जीवन के जीवन के शुरुआती 1000 दिनों में उनके पोषण का ध्यान रखना ज़रूरी
-गर्भावस्था की शुरुआत से ही पोषण का रखना होगा खय़ाल -कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर भुरे
दक्षिणापथ, दुर्ग।
पोषण माह के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्तनपान और कुपोषण विषय पर चर्चा करने के लिए वेबिनार का आयोजन किया गया। जिसमें विषय विशेषज्ञों ने बताया कि कुपोषण से बचाव के लिए शैशवास्था के शुरुआती 1000 दिन तक अनिवार्य रूप से बच्चों को मां का दूध ही पिलाना चाहिये। बच्चों के सर्वोत्तम विकास के लिए स्तनपान बहुत महत्वपूर्ण हैं कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा कि कुपोषण से बचाव के लिए सबसे पहले माता के पोषण पर ध्यान देना ज़रूरी है। क्योंकि अगर मां स्वस्थ और सुपोषित होगी तभी गर्भस्थ शिशु का विकास होगा। इसलिए महिला एवं बाल विकास विभाग व स्वास्थ विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने गर्भावस्था में आयरन फोलिक एसिड के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गर्भावस्था में इनका बहुत अधिक महत्व है इसलिए सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं यह सुनिश्चित करें कि महिलाएं आयरन फॉलिक एसिड का सेवन अवश्य करें । कलेक्टर ने कहा बच्चे ग्रोथ इयर्स के दौरान शुरू के 1000 दिनों में स्तनपान बहुत जरूरी है। इसके साथ शेड्यूल्ड टीकाकरण भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग गर्भावस्था से लेकर शिशु जन्म के बाद 6 वर्ष की आयु तक विभिन्न प्रकार की सेवाएं देता है । उन्होंने सभी से इन सेवाओं का लाभ लेने तथा जिले में कुपोषण के प्रतिशत को कम करने में सहयोग प्रदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में यद्यपि आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेवाएं प्रभावित हो रही है। तथापि अभिभावक द्वारा घर-घर जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से रेडी-टू-ईट फूड पहुंचाया जा रहा है ।

उन्होंने कोरोनाकाल के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा घर-घर जाकर सर्वे करने के कार्य की प्रशंसा की और उन्हें बेहतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि कोविड के कारण बच्चों का पोषण स्तर कम न हो। इसलिए डोर टू डोर सर्वे माताओं व बच्चों ब हाल चाल भी लेते रहें। दुर्ग भिलाई एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक से के डॉ. नोहर सिंह ठाकुर ने बताया कि रिसर्च से पता चला है कि जन्म के बाद शिशु के जीवन के शुरुआती 1000 दिन बच्चे के विकास में सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं इसलिए उनके पोषण का खास ख्याल रखना ज़रूरी है। विषय विशेषज्ञ डॉ. ओमेश खुराना ने स्तनपान कराने वाली माताओं के आहार व कोरोना काल में बरती जाने वाली सावधानियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्तन पान के समय माता को मास्क पहनना अनिवार्य है। कोविड-19 वायरस माँ के दूध में नहीं होता है। यदि माता संक्रमित भी है तो मास्क पहनकर स्तनपान कराया जा सकता है। लेकिन पहले माता को अच्छी तरह से हाथ धोकर,मास्क लगाकर स्तनपान कराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि माँ का दूध बच्चे की इम्म्युनिटी बढ़ाता है इसलिए जन्म के तुरंत बाद बच्चे को माता द्वारा दूध पिलाना जरूरी है। डॉ. सीमा जैन ने 6 माह की उम्र के बाद पूरक पोषण आहार एवं बच्चों के विकास पर विस्तार से चर्चा की।सुश्री अमनदीप ने स्तनों की देखभाल एवं स्वच्छता के बारे में बताया। जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन ने बताया कि महिला बाल विकास विभाग द्वारा महीने भर विभिन्न आयोजन किए गए। कोविड संक्रमण के दौरान सभी आवश्यक प्रोटोकॉल्स का पालन करते हुए जिले की सभी परियाजनाओं एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में कुपोषण को दूर करने के लिए किए जा रहे नवाचारों के बारे में भी बताया गया। यूनिसेफ के अभिषेक सिंह ने पोषण को लेकर समाज में व्यवहार परिवर्तन पर चर्चा की। इस लाइव कार्यक्रम में जिले की सभी परियोजनाओं के सीडीपीओ और सुपरवाइजर शामिल हुए।

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