विद्यर्थियों ने शिक्षा सार्थियो के साथ मनाई शहीदे आज़म भगत सिंह की जयंती


दक्षिणापथ, ननकटठी। कोरोना काल में भी शासकीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला बोड़ेगांव के विद्यार्थियों ने शिक्षा सार्थियों के साथ मनाई शहीदे आजम भगत सिंह की जयंती । उनकी प्रेरक जीवनी की कहानी सुनकर,जीवनी के प्रेरक संदेश सुनकर और देशप्रेम की शपथ लेकर मनायी भगत सिंह जयंती। शासकीय प्राथमिक शाला बोड़ेगांव व पुर्व माध्यमिक शाला बोड़ेगाँव, संकुल केन्द्र – जेवरा सिरसा में एक सच्चे देश भक्त शहीदे आजम भगत सिंह जी की जयंती पर छात्रों को शिक्षा सार्थियों द्वारा उनके जीवन के प्रेरक प्रसंग व संदेश सुनाकर उनको याद किया गया। उनकी शहादत के और अंग्रेजी सरकार से देश की आजादी के लिये अंग्रेजों के विरूद्ध किये गये उनके बलिदान की जानकारी देकर सभी छात्रों को देशप्रेम की शपथ भी दिलाई गयी । शुरुआत में शिक्षासारथी रविन्द्र सेन, टीकम देवांगन व जया देवांगन द्वारा शहीदे आजम भगत सिंह जी के तैल्य चित्र पर तिलक लगाकर की गयी। कार्यक्रम में बच्चों को भगत सिंह जी शूरवीरता,साहस,पराक्रम और उनकी कुशाग्र बुद्धि द्वारा अंग्रजों के छक्के छुड़ाने के किस्से सुनाये गये। बच्चों को यह बताया गया कि 8 वर्ष की छोटी सी उम्र में गांधी जी के असहयोग आंदोलन में भगत सिंह कैसे अंग्रेजों को चकमा देकर विदेशी सामानों की होली जलाते थे ।

फिर उन्हें शासकीय विद्यालयों से निकाल दिया तो उन्होंने किस संघर्ष से लाला लाजपत राय जी के द्वारा बनाये गए स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण की और वहां भी गीत संगीत एवं अभिनय के माध्यम से भी अंग्रेजों की नीतियों का विरोध किया।विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किस तरह उन्होंने अपनी शूरवीरता, साहस और पराक्रम से किस तरह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन संगठन में रहकर भारत को आजाद करने के लिये अंग्रेजों से लोहा लिया था। भगत सिंह जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का वीडियो में विद्यार्थियों को यह भी दिखाया गया कि भगत सिंह ने अपने साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ निर्भीक होकर असेम्बली में बम फेंका था ।और लालालजपत राय जी की हत्या का बदला लेने के लिए अंग्रेज अधिकारी की हत्या की थी।और सहर्ष अपनी गिरफ्तारी दी थी, जेल में रहकर अपनी जायज मांगों के लिये लगातार 55 दिन तक उपवास रखकर अंग्रजों को झुकाकर अपनी जायज मांगें मनवाई थी।और अंत समय में जब उन्हें फांसी की सजा दी गई तब भी उन्होंने फांसी के फंदे को चूमकर हँसते हँसते मौत को गले लगाया था।इस अवसर पर भगत सिंह जिंदाबाद,भगत सिंह अमर रहे,और भगत सिंह द्वारा गया हुआ गीत मेरा रंग दे बसंती चोला भी गाया गया।

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