अपने जीते जी उन्होंने मृत्यु पत्र लिखा, मेरी मृत्यु का महोत्सव मनाए…

दक्षिणापथ, दुर्ग। जैन समाज की वरिष्ठ श्राविका श्रीमती हुलास देवी श्री श्रीमाल धर्मपत्नी स्वर्गीय मोहनलाल श्री श्री माल को संथारे का संकल्प कराते हुए परिवार एवं जैन समाज के वरिष्ठ सदस्यों की आज्ञा से श्री प्रकाश मुनि जी महाराज की आज्ञानुवर्तनी साध्वी श्री गीता जी महाराज साहब के मुखारविंद से हुलासी देवी श्री श्री माल को जैन साधु दीक्षा प्रदान की गई और उनका नया नाम हुलासी श्रीजी प्रदान किया गया। दुर्ग जैन समाज के वरिष्ठ पार्षद मदन जैन तथा सहेली ज्वेलर्स के संचालक सुनील जैन अनिल जैन एवं राजेंद्र जैन की माताश्री थी। समरथ गछ के संत श्री उत्तम मुनि जी महाराज के प्रति अपार श्रद्धा भक्ति रखने वाली तथा जैन समाज के संत सातियों की हमेशा सेवा भक्ति करने वाली संथारा साधिका धर्म के मर्म को हमेशा समझने वाली श्रीमती हुलासी देवी श्री श्रीमाल ने सन 2013 में ही अपना एक मृत्यु पत्र बनवा लिया था जिसमें परिवार के सभी सदस्यों को इसकी सूचना भी उन्होंने दी थी इस पत्र पर उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की थी कि मेरी मृत्यु संथारा में ही हो मेरी मृत्यु के पश्चात किसी भी तरह का कोई सामाजिक आडंबर ना हो ऐसा निवेदन उन्होंने परिवार और समाज के लोगों से किया था विगत 10 दिनों से फेफड़े में संक्रमण के कारण उनका इलाज नारायणा हॉस्पिटल रायपुर में चल रहा था स्वास्थ्य में सुधार नहीं आने की स्थिति देखकर परिवार के सदस्यों ने उन्हें घर लाने का निर्णय लिया और वही पारा दुर्ग के प्रेम कुंज में मंगल पाठ का श्रवण एवं सभी जीवो से क्षमा याचना करते हुए उन्हें सुधर्म जैन पोषघशाला बांघा तालाब दुर्ग में जैन साधु दीक्षा साध्वी गीता जी महाराज साहब के द्वारा दिलाई गई। आज के इस संक्षिप्त कार्यक्रम के दौरान जैन समाज के सभी संघ प्रमुख विशेष रुप से उपस्थित थे।

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