ब्लैक एंड वाइट से सिल्वर स्क्रीन तक…

दक्षिणापथ । आज जिस TRP की पीछे फ़िल्म इंडस्ट्री व इलेक्ट्रॉनिक चैनल पागल हुए जा रहे है, क्या आपको पता है कि 70-80 के दशक में TRP नाम की कोई चीज नही होती थी लेकिन TRP से ज्यादा दर्शको को दिल मे फ़िल्म अपना अनूठा छाप छोड़ जाता था, बच्चन साहब के हर उम्र के लोग फैन हुआ करते थे लेकिन आज के दौर में, वेब सिरीज व फ़िल्म में TRP का खेल है वही फैन का।
90 का दौर सिंगी का रहा है हर कोई सिंगर को कॉपी करते रहे है। अब यह सोशल मीडिया or OTT ने पूरी तरह सिनेमा का रुख बदल दिया है।

पहले की फ़िल्म ब्लैक एंड वाइट हुआ करती थी आज के मूवीज से कम नही है, भले ही हम ब्लैक एंड व्हाइट देखना नही चाहते है पर आज बहुत से मूवीज का रिमेक बना रहा है वही, सांग्स भी रिमेक, कहि न कही ब्लैक एंड वाइट भी उतना ही दर्शनिक रहा जितना आज ott और थिएटर है।

बात कही जाये लाइम लाइट की या रोल मॉडल को फॉलो करने की तो यह समझ समझ की बात कुछ लोगो को भारतीय सिनेमा गन्दा लगता है कुछ लोगों को बहुत अच्छा, कुछ देखते ही नही है। भारतीय सिनेमा का इतिहास समृद्ध रहा है बहुत से अच्छे किरदार है कहानी है वही बुरे भी है, आपके अपने तरीके है किसे फॉलो करते है।

एक मूवी या वेब सीरीज कहानी पर बनती है, उसका प्लाट कैसे होता है, सब पर बरीक़े से नजर रखा जाता है, पहले लोकशन मायने रखता था साथ ही कहानी भी, लेकिन आज के दौर में DOP से लेकर स्क्रीनप्ले की गलियारों में सिनेमाटोग्राफी साथ ही एडिटिंग व म्यूजिक, पहले म्यूजिक बजता था डांस करते पीछे चार लोग पंखे हिलाते नजर आते थे लेकिन आज के दिनों में स्टंट मायने रखता है।

डायरेक्शन सबसे बड़ा मायने रखता है, कहानी को किस तरह डायरेक्ट कर रहे है और एडिटर कहानी के किस कंटेंट को परोसेगा यह सब सिल्वर स्क्रीन का रहस्य है।

कुलमिलाकर सिनेमा समय के साथ बदला है, फ़िक्शन पर बने लगी है वेब सीरीज में बाढ़ आ गया है लेकिन बहुत से अच्छे जेनर पर बनी वेब सिरीज़ देख सकते है जो अच्छे है, Avarodh : The siege within, She, Asur, Brethe Into the shadow, Crackdown, illegal, marzi, The final call, The Family Men etc, बहुत से अच्छे सीरीज है। वही मूवी भी अक्षय कुमार, आयुष्मान खुराना, विक्की कौशल की मूवीज देखने लायक होती है।
( अमित चंद्रवंशी )

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