केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के खिलाफ हुए आंदोलन का असर छत्तीसगढ़ के गांवों में भी दिखा

दक्षिणापथ, आरंग। भारत बंद का असर छत्तीसगढ़ के गांव में भी दिखा जिले में लाक डाउन होने के कारण जिला एवं ब्लाक मुख्यालयों में प्रदर्शन ना होकर गांव के किसान अपने खेत खलिहान चौपाल अपने घर के दरवाजे से ही प्रदर्शन कर सरकार से मांग किया कि एमएसपी को पूर्ण रूप से कानूनी गारंटी दिया जाए तथा मंडी के अंदर और बाहर समर्थन मूल्य में धान बेचने का कानून बनाया जाए क्योंकि इस कानून के बिना तीनों अध्यादेश किसानों का शोषण का कारण बनेगा तथा व्यापारियों को मनमाना शोषण का अधिकार मिल जाएगा स्वयं सरकार इन व्यापारियों के खिलाफ कुछ नहीं कर सकेगा। क्योंकि कानून बनाकर खुद उनका रास्ता आसान कर दिया है यहां तक कोर्ट जाने के रास्ते को भी बंद कर दिया गया है इसका असर इसी साल से किसानों को दिखने लगेगा क्योंकि मंडी में व्यापारी को टैक्स देकर खरीदना पड़ेगा और बाहर उसे किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगेगा तो अब व्यापारी टैक्स देने क्यों मंडी में खरीदी करेगा ऐसी हालात में पूरे देश में मंडी की व्यवस्था स्वत: चरमरा कर बैठ जाएगी सरकार लाख सफाई दे पर किसानों को बर्बाद करने से या काला कानून रोक नहीं पाएगा अभी भी वक्त है केंद्र सरकार किसान हितैषी होने का परिचय देते हुए एक लाइन का प्रस्ताव कर एमएसपी को कानूनी गारंटी देने कानून बनाएं। किसान नेता पारसनाथ साहू ने बताया कि यह प्रदर्शन जिले के ग्राम भिलाई भलेरा निसदा टेकारी परसकोल खौली सहित अनेक ग्रामों में किया गया।

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