सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को आमजनों ने सराहा, कहा दीर्घकालिक समुन्नत परिणाम आएंगे

दक्षिणापथ, दुर्ग। छत्तीसगढ़ में 51 इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने जा रहें है। सरकार का कहना है कि वो प्राइवेट स्कूल को टक्कर देगी पर यह कितना सम्भव है?
यह कैसे सम्भव हो पायेगा? यह सवाल पूछने पर आमजनों ने अपनी राय रखी है।
सदेन्द्र देशमुख का कहना है कि
रुझान तो अच्छे मिले हैं पहले वर्ष ही एडमिशन के लिए मारामारी थी जितने सीट है उससे ज्यादा आवेदन आए थे हर जगह ।
लेखिका सुधा वर्मा के मुताबिक स्तर अंग्रेज़ी मिडियम की तरह न दिखावा वाला नही रहेगा। पर पढ़ाई ठीक रहेगी ऐसा मुझे.लगता है। स्कूल भी अंग्रेज़ी स्कूल की तरह साफ सुथरा हो तो बच्चों की संख्या बढ़ेगी।
युवा नेता विजय चन्द्राकर का मानना है किराज्य शासन का ये एक अच्छा प्रयास है, जन सहयोग की आवश्यकता है खासकर मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा परिवार , जब ये लोग इस स्कूल से नही जुड़ेंगे तब तक इसका प्रचार प्रसार और स्टैंडर मेंटेन मुश्किल कार्य है।
ऐसे घरों के बच्चे आना जरूरी जिनके घरों में पढ़ाई का माहौल होता है। स्कूल की चमक परिणाम के रूप में बाहर आयेगा तब आकर्षण बढ़ेगा। सरकार अपना प्रयास कर रही है, शिक्षक और मैनेजमेंट भर्ती प्रक्रिया ईमानदारी और कड़े नियम से होने चाहिये।इससे पहले भी शुरुआत हुई थी, आज से 18 साल पहले CBSE स्कूल की, ये शिक्षा सुधार का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट था परन्तु नया राज्य और कम संसाधन के कारण छात्र डर गये, पुराने शिक्षक उस स्तर के नही थे। उस समय सुधार करते हुए आज ये चलता तो शासकीय स्कूल की बात ही कुछ और होती। शुरू में मुश्किल जरूर आती
नवजवान चिंतक व कवि अमित चंद्रवंशी कहते है किकेन्द्रीय व नवोदय विद्यालय के तर्ज पर शिक्षकों का भर्ती प्रक्रिया होगी तब निश्चित ही, 51 स्कूल छत्तीसगढ़ की दिशा बदल देगी।

छत्तीसगढ़ मिनरल्स व धान के लिए बहुत ही समृद्ध है, लेकिन भिलाई की शिक्षा व्यवस्था से एक नये युग की शुरुआत शिक्षा के क्षेत्र में हो चुका है।

समाजसेविका ज्योति चन्द्राकर ने कहा कि सेक्टर 6 में गवर्मेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल जब से खुला है लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। टीचर्स भी बहुत मेहनत कर रहें हैं। मुझे लगता है कि ऐसे मेहनत चलती रही और निशा और यशवंत वर्मा जैसे समझदार लोग मिलते रहे तो ये स्कूल अच्छी चल पड़ेगी ही नही बल्कि दौड़ पड़ेगी। निशा ने उसपर भरोसा करके अपने बेटे को एडमिशन दिलाई ये काबिले तारीफ है। और आज के कॉम्पिटिशन के जमाना में यशवंत वर्मा जी ने जिनकी बिटिया दसवीं में 95 प्रतिशत लाई थी उसने भी अपने दोनों बिटिया को गवर्मेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल में एडमिशन दिलाई। ये सचमुच तारीफ के काबिल है। 1 वर्ष पहले से 6 स्कूल फेसलिटी की कमी से जूझ रही थी और आज एक अच्छा उदाहरण पेश किया है। हमारे संगठन भी स्कूल के मदद में आगे आये थे।
शिक्षिका शीला चंद्रा ने इसे सरकार का वर्तमान समय के परिपेक्ष्य में बहुत ही सराहनीय कदम बताते हुए आगे कहा कि
जिसे आम जनता के सहयोग से ही फलीभूत किया जा सकेगा।
ग्राम में प्रतिभाओ की कमी नही ,,बहुत से साधन सम्पन्न पालक अपने गांव के सरकारी स्कूल को छोड़ 4 से 5 km दूर अपने पाल्यो को eng मीडियम में दाखिला कराते है वजह उन्हें उस सम्बंधित स्कूल में पढ़ाई के अतिरिक्त पूरी सुविधा मिल सके। जब ये सुविधा orr मीडियम अपने गांव या आसपास मिल जाये तो निश्चय ही ग्रामीण बच्चे इन eng मीडियम के स्कूलों की तरफ रुख करेंगे एक प्राइवेट संस्था जो कि 2 या 3 कमरों से शुरू होती है करीबन 10 से15 साल लगते है एक नामचीन संस्था बनने में इसलिए ये अंग्रेजी माध्यम के स्कूल फिलहाल प्राइवेट स्कूल को टक्कर तो नही देंगे, पर दूरगामी उज्ज्वल भविष्य तय होगा।

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