सोशल मीडिया पर चल रहे इन खबरों की सत्यता बताने वाला कौन?

आइए नजर डालें इस ट्रेंड पर

दक्षिणापथ, दुर्ग। पिछले 7-8 वर्षों में कुछ ऐसी बातें सोशल मीडिया में वायरल हुये जिनकी सत्यता बताने वाला कोई नही। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर परोसे गए ओकर पाठ्य सामग्रियां का देश व समाज पर क्या असर हो रहा है इसे भविष्य बताएगा। आइए सोशल मीडिया पर क्या ट्रेंड चल रहा है, आपको भी बताएं।
पता चले जो हैरान करने वाले थे।. सोशल मीडिया से यह बताया जाता है कि “पत्रकार” निष्पक्ष नही होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुड़े होते हैं।लेखक, साहित्यकार भी निष्पक्ष नही होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुडे होते है। (भारत विरोधी) साहित्य अकादमी, बुकर, मैग्ससे पुरस्कार प्राप्त बुद्धिजीवी भी निष्पक्ष नही होते। फिल्मों के नाम पर एक खास विचारधारा (इस्लाम) को बढ़ावा दिया जाता है। बालीबुड के इस सच की भी जानकारी दी जा रही है ।
हिन्दू धर्म को सनातन धर्म कहते हैं और देश का नाम हिंदुस्तान है, क्योंकि यह हिंदुओं का इकलौता देश है।हिन्दू शब्द सिंधु से नही (ईरानियों द्वारा स को ह बोलने से) नही आया बल्कि “हिन्दू” शब्द “ऋग्वेद” में लाखों वर्ष पूर्व से ही वर्णित था। जातिवाद, बाल विवाह, पर्दा प्रथा हजारों वर्ष पूर्व सनातनी नही बल्कि मुगलों के आगमन से उपजी कु-व्यवस्था थी, जिसे अंग्रेजों ने सनातन से जोड़कर हिन्दुओ को बांटा। उसे लिखित इतिहास बनाया।
किसी समय भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म पूरे विश्व मे फैला था।
वास्कोडिगामा का सच ये कहा जा रहा है कि वह एक लुटेरा, धोखेबाज था और किसी भारतीय जहाज का पीछा करते हुए भारत पहुंचा। इसी तरह बप्पा रावल का नाम, काम और और अद्भुत पराक्रम का उल्लेख किया जाता है। उनसे डरकर 300 वर्ष तक मुस्लिम आक्रांता इधर झांके भी नहीं। बाबर, हुमायूँ, अकबर, औरंगजेब, टीपू सुलतान सहित सभी मुगल शासक क्रूर, हत्यारे, इस्लाम के प्रसारक और हिंदुओं का नरसंहारक थे, यह बताया जा रहा है। ताज़महल, लालकिला, कुतुब मीनार हिन्दू भवन थे, इनकी सच्चाई कुछ और थी।
जिसे लोग व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी कहकर मजाक उड़ाते हैं, उसी ने हेडगेवार, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल व हिन्दू समाज के साथ की गई सच्चाई बताई।
कहा जा है कि भारतीय इतिहास के नाम पर हमें झूठा इतिहास पढ़ाया गया, जिन मुगलों ने हमे लूटा, हम पर अत्याचार किया उन्हें महान बताया गया।
नेहरू की असलियत, उनके इरादे, उनकी हरकतें, पता चली।
POJKL के बारे मे भी इन 6 वर्षों में जाना कि कैसे पाकिस्तान ने कब्जा किया। और कौन लोग POJKL को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं। अनुच्छेद 370 और उससे बने नासूर का उल्लेख किया जा रहा है।
कश्मीर में दलितों को आरक्षण नही मिलता, यह भी अब पता चला। कैसे AMU मे दलितों को आरक्षण नही मिलता, वह संविधान से परे है। जेएनयू की असलियत, वहाँ के खेल और हमारे टैक्स से पलने वाली टुकड़े टुकड़े गैंग का पता चला। वामपंथी-देशद्रोही विचारधारा के बारे मे पता चला।
जय भीम समुदाय के बारे मे पता चला कि भीमराव के नाम पर उनके मत से सर्वथा भिन्न खेल चल रहा है। मीम भीम दलित औऱ हिन्दू दलित अलग होते है पता चला। मदर टेरेसा की असलियत अब जाकर ज्ञात हुई। ईसाई मिशनरी और धर्मांतरण के बारे में पता चला।
समुदाय विशेष में तीन तलाक, हलाला, तहरुष, मयस्सर, मुताह जैसी कुरूतियों के नाम भी अब जाकर सुना। इनका मतलब जाना। अब मुझे पता चला कि धिम्मी, काफिर, मुशरिक, शिर्क, जिहाद, क्रुसेड जैसे शब्द हिन्दुओं के लिए क्या संदेश रखते हैं।
सच बताऊं, गजवा ऐ हिन्द के बारे मे पता भी नहीं था। कभी नाम भी नहीं सुना था। यह सब इन 7 वर्षों में पता चला। स्टॉकहोम सिंड्रोम और लवजिहाद, सेकुलरिज्म, मानवाधिकार, बॉलीवुड, बड़ी बिंदी गैंग, लुटियंस जोन इन सबके लिए तो हिन्दू एक चारा था। हिन्दू पर्सनल लॉ और मुस्लिम पर्सनल लॉ अलग हैं, यह भी सोशल मीडिया ने ही बताया। नेहरू ने हिन्दू पर्सनल लॉ को समाप्त कर दिया। लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ को रहने दिया।

और भी कई विषय हैं जो इन 7 -8 वर्षो मे वायरल हुए है जो देश से छुपाए गये थे।
सोशल मीडिया पर चलने वाले इस इतिहास के उक्त कथित सच की प्रमाणिकता बताने वाला कोई नही। न ही सरकार इस पर संज्ञान लेता है।
पर यह भी सच है कि इसे बड़े चाव से पढ़े जाते है और निरंतर आगे प्रेषित किये जाते है। इस पर चर्चा करना प्रासंगिक था।

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