कोरोना का डिप्रेशन, बच कर रहे


दक्षिणापथ, दुर्ग। कोरोना काल मे काफी लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों का अनुमान है कि अक्टूबर तक 15 से 20 % लोग किसी न किसी मात्रा में इसका शिकार हो चुके होंगे।
डॉ सत्यदेव खिचरिया बताते है कि डिप्रेशन चिकित्सकीय नाम है , थोड़ी बहुत चिंता तो सबको होती है होना भी चाहिए । मैं डिप्रेशन में हूं या ये व्यक्ति डिप्रेशन में है कहकर हम उनका ही नुकसान तो नहीं कर रहे हैं ये सोचने वाली बात है । हमेशा अपने सुख दुख सबसे शेयर करना चाहिए ।न खुशी में इतना उलझो की संघर्ष भूल जायें न दुख में इतना डूब जायें कि स्वयं को भूल जायें ।तमाम कोशिश के बाद भी यदि कुछ घट जाये तो उससे निराश होने की जरूरत नहीं दूसरे रास्ते की तलाश करें ,संघर्ष ही जीवन है घबराना नहीं बल्कि डट कर सामना करना है। मैं कभी सुख में या दुख में कभी भी इतनी नहीं खोई कि डिप्रेशन में आ जाऊं ।हर बार बाहर निकलने के रास्ते तलाश किया है। यदि ऐसा महसूस हो कि किसी का बिहैवियर असहज है और उसे किसी मनोचिकित्सक को दिखाने की आवश्यकता महसूस हो रही है तो जरुर बिना देरी करे दिखाना चाहिए । मुझे लगता है बचपन से ही बच्चों को ठोक बजा के रखना चाहिए । अपने संघर्ष के दिनों को, अपनी तकलीफों का आपने किस तरह से सामना किया ये बात शेयर करना चाहिए जिससे उनका मनोबल स्ट्रांग बने और डिप्रेशन आ ही न पाए। एक ऐसा मित्र हो जिससे अपनी हर सुख दुख परेशानियां शेयर किया जा सके जो सही सलाह दे , फिर हमें मनोचिकित्सक की जरूरत भी नही पड़ने वाली ।
सन्त व विचारक B R ब्रम्हांश कहते है कि साइकिल और जिंदगी तभी बेहतर चल सकती है जब चैन हो। इसलिए अवसाद में न रहें , जो है , ईश्वर ने जितना दिया है उतने में खुश रहने की कोशिश करें ।

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