सड़क बनना तो सपना के समान हो गया साहब कम से कम गड्ढे तो भरवा दीजिए

दक्षिणापथ, बलरामपुर(विकाश कुमार केशरी)। रामानुजगंज से राजपुर तक नेशनल हाईवे 343 की स्थिति ऐसी हो गई है कि अब इसमें चलना दिन प्रतिदिन मुश्किल होते जा रह है। नेशनल हाईवे बनना अभी सपना है परंतु गड्ढे तो कम से कम नेशनल हाईवे भरवा सकता है परंतु गड्ढा भरवाने तक की जहमत नेशनल हाईवे के अधिकारी नहीं उठा पा रहे हैं जिससे गाडिय़ों के रफ्तार पर लगाम तो लग ही  रही है प्रतिदिन  दुर्घटनाएं भी हो रही हैं वही सफर भी बहुत मुश्किल भरा रह रहा है। नेशनल हाईवे के अकर्मण्य रवैया से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है जो कभी भी आंदोलन का स्वरूप ले सकता है
गौरतलब है कि नेशनल हाईवे 343 में रामानुजगंज से राजपुर के बीच अनगिनत गड्ढे हो गए हैं जिनमें वाहनों का आना जाना बहुत ही मुश्किल  हो रहा है खासकर छोटे वाहनों को तो आने जाने में ज्यादा परेशानियां हो रही है परेशानी तब और बढ़ जाती है जब सड़क में पानी जमा हो जाता है ऐसे में ड्राइवरों को अंदाज लगाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क पर कितना गड्ढा है जिस कारण गाडिय़ां काफी धीरे धीरे चलती हैं वहीं दुर्घटना की संभावना भी ज्यादा हो जाती है। एक और जहां नेशनल हाईवे 343 के गड्ढे और बड़े होते जा रहे हैं वहीं विभाग के अधिकारी इसे भरवाना तो दूर देखने तक की जहमत नहीं उठा पा रहे हैं जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
राजपुर से बलरामपुर के बीच में सबसे अधिक गड्ढा
रामानुजगंज से बलरामपुर के बीच तो बड़े-बड़े गड्ढे हैं ही वही सबसे अधिक परेशानी बलरामपुर से राजपुर आने जाने में होती है सबसे अधिक गड्ढे राजपुर एवं बलरामपुर के बीच में है राजपुर से बलरामपुर तक का सफर बहुत ही मुश्किल भरा रहा है।
मुख्यमंत्री का निर्देश भी है बेअसर- छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार के गठन के बाद जब उनका बलरामपुर रामानुजगंज जिले में तातापानी प्रवास हुआ था तब उन्होंने नेशनल हाईवे की दुर्दशा को देखते हुए नेशनल हाईवे के अधिकारियों को 1 माह के अंदर सड़क को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे परंतु 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी नेशनल हाईवे के अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी।
गड्ढों में पानी भरने के बाद होती है दुर्घटना की ज्यादा संभावना
नेशनल हाईवे 343 में रामानुजगंज से लेकर राजपुर तक अनगिनत गड्ढे हैं इसमें दुर्घटना की ज्यादा संभावना तब होती है जब इनमें बरसात का पानी भर जाता है जिससे पता नहीं चल पाता है कि किस गड्ढे की कितनी गहराई।

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