इस बार पहली पसंद बनी स्वदेशी राखी, रक्षा के चीनी बंधन को पछाड़ 7 हजार करोड़ का कारोबार

इस बार पहली पसंद बनी स्वदेशी राखी, रक्षा के चीनी बंधन को पछाड़ 7 हजार करोड़ का कारोबार

 चीनी राखी ने इस वर्ष अपना बाजार खो दिया है। लोकल फॉर वोकल अभियान ने इस वर्चस्व को कम किया व लोगों ने स्वदेशी राखी खरीदने में ज्यादा विश्वास दिखाया। इस तरह से चीन को राखी के व्यापार में तगड़ा झटका लगा है। व्यापार जगत का दावा है कि पूरे देश में स्वदेशी राखी का करीब सात हजार करोड़ का कारोबार हुआ। 


चीन निर्मित सामान का दबदबा इतना ज्यादा हो गया था कि दैनिक जीवन में भी लोग चीनी सामानों का उपयोग कर रहे थे। यहां तक कि पर्व व त्योहारों के मौके पर इसकी बिक्री जमकर होती थी, लेकिन इस साल रक्षा बंधन पर स्थिति उलट रही। इस बार चीनी राखी के बजाय स्वदेश निर्मित राखी की बिक्री ज्यादा हुई। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने दावा किया कि चीन निर्मित सामान से लोगों का विश्वास कम हो रहा है।


एक अनुमान के आधार पर बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर स्वदेशी राखी का 7 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है। वैदिक राखी के उपयोग का भी आह्वान किया गया था। ताकि प्राचीन संस्कृति और राखी त्योहार की पवित्रता को पुनर्जीवित किया जाए। लोगों ने स्वदेशी राखी खरीदने में रुचि दिखाई है। 

खूब बिकी वैदिक राखी ः इस वर्ष वैदिक राखी की धूम रही। इसमें दूर्वा, अक्षत, केसर, चंदन और सरसों के दाने को रेशम के कपड़े में सिलकर कलावा बनाया गया था। इन पांच चीजों का वैदिक महत्व है, जो परिवार की रक्षा और उपचार से संबंधित है। दूर्वा भगवान गणेश को प्रिय है और यह दर्शाता है कि बहनों के भाई अपने जीवन में बाधाओं को नष्ट कर देंगे और सभी बड़ों की भक्ति कभी भी बर्बाद नहीं होगी। लिहाजा लोगों ने भी इस तरह की राखी को पसंद किया। 

सभी बस स्टॉप पर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ दिखी और यह सिलसिला शाम तक चलता रहा। उधर, दूसरे शहरों में आने जाने वालों की बस अड्डों पर भीड़ रही।
रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली मेट्रो ने दो लाइनों को छोड़, शेष सभी लाइनों पर अतिरिक्त मेट्रो, टिकट काउंटर और कर्मियों को मुस्तैद किया गया था। सुबह से ही बस, मेट्रो, ऑटो और कैब में यात्रियेें की खूब भीड़ रही। कुछ स्टॉप पर महिलाओं को बस के लिए थोड़ा इंतजार भी करना पड़ा।

सार्वजनिक जगहों पर दिखी लापरवाही
त्योहार पर सड़कों पर भी हर तरफ जाम का माहौल रहा। मार्केट और सड़कों पर हर तरफ लोग ही लोग नजर आ रहे थे। हालांकि इनमें से अधिकतर लोगों ने मास्क नहीं लगाए थे। दिल्ली में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना अनिवार्य किए जाने के बाद कुछ जगहों पर इसका असर दिखा। बसों में अभी तक मास्क पहनना अनिवार्य नहीं किए जाने से कुछ जगहों पर बेफिक्री भी दिखी।