तबियत ठीक होने पर सोनिया गांधी ईडी दफ्तर जायेंगी

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Ro No. 12059/86



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-भाजपा ईडी, सीबीआई, आईबी के सहारे सरकार चलाना चाहती है
-नेशनल हेराल्ड मामले में कुछ भी गलत नहीं है
-राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की पत्रकार वार्ता
रायपुर । राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुये कहा कि हम हर गलत का विरोध करते हैं। गलत का विरोध नहीं करना मतलब गलत को स्वीकार करना है। ईडी की द्वेषपूर्ण कार्यवाही का कांग्रेस विरोध करती है। भाजपा ईडी, सीबीआई, आईबी के सहारे से  सरकार चलाना चाहती है। कांग्रेस इसका हर स्तर पर विरोध करेगी। श्री तनखा ने कहा कि हमारे लीडरशिप ने यह डिसाइड किया है वहां जाकर ईडी को पेश करेंगे, 13 जून को ईडी के ऑफिस जा रहे है। सोनिया गांधी  की तबियत ठीक हो जायेगी तो ईडी ऑफिस जाएंगी, वे निर्णय ले चुकी हैं। हम इंक्वायरी इंविटेशन पेश करने को तैयार हैं। हमने कोई अपराध ही नहीं किया है तो डर किस बात का।
राज्यसभा सांसद तनखा ने कहा कि नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की स्थापना पं. जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, पुरूषोत्तम टंडन, आचार्य नरेन्द्र देव, रफी अहमद किदवई और अन्य नेताओं द्वारा वर्ष 1937 में की गई, ताकि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नामक कंपनी को स्थापित करके देश में स्वतंत्रता आंदोलन को आवाज दी जा सके। 1942 से 1945 तक अंग्रेजों द्वारा 'भारत छोड़ोÓ आंदोलन के दौरान इस समाचार पत्र को प्रतिबंधित कर दिया गया था, जिसे महात्मा गांधी ने ''राष्ट्रीय आंदोलन के लिये एक त्रासदी'' के रूप में वर्णित किया था।
उन्होंने कहा कि इस समाचार पत्र की संपादकीय उत्कृष्टता के बावजूद, नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र निरंतर आर्थिक रूप से घाटे में जाता गया, जिसके परिणाम स्वरूप इसके द्वारा देय बकाया राशि 90 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इस संकट में फंसे नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की सहायता के लिये कांग्रेस पार्टी ने वर्ष 2002 से लेकर 2011 के दौरान लगभग 100 किश्तों में इसे 90 करोड़ रुपये ऋण दिया। इसमें महत्वपूर्ण ध्यान देने वाली बात यह है कि इस 90 करोड़ रुपए की राशि में से नेशनल हेराल्ड ने 67 करोड़ रुपए अपने कर्मचारियों के वेतन और वीआरएस का भुगतान करने के लिये उपयोग किए और बाकी की राशि बिजली शुल्क, गृह कर, किरायेदारी शुल्क और भवन व्यय आदि सरकारी देनदारियों के भुगतान के लिए इस्तेमाल की गई।
राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने कहा कि भाजपा में बैठे लोग और उनके हितैषी, जो कि नेशनल हेराल्ड को दिए गए इस 90 करोड़ रुपये के ऋण को आपराधिक कृत्य के रूप में मान रहे हैं, ऐसा वह विवेकहीनता और दुर्भावना से अभिप्रेरित  होकर कह रहे हैं। यह सर्वथा अस्वीकार्य है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल द्वारा ऋण देना भारत में किसी भी कानून के तहत एक आपराधिक कृत्य नहीं है। फिर, कांग्रेस पार्टी द्वारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (1937 से कांग्रेस पार्टी से निकटता से जुड़ी और कांग्रेस की विचारधारा का समर्थन करने वाली कंपनी) को समय-समय पर कुल 90 करोड़ रुपये का ऋण देना कैसे एक आपराधिक कृत्य माना जा सकता है? इस ऋण को विधिवत रूप से कांग्रेस पार्टी के खातों की किताबों में दर्शाया गया था, जिसका विधिवत लेखा-जोखा किया गया और भारत के चुनाव आयोग को प्रस्तुत भी किया गया।
यहां तक कि चुनाव आयोग ने दिनांक 06.11.2012 के अपने एक पत्र के माध्यम से सुब्रमण्यम स्वामी को यह स्पष्ट करते हुए लिखा था कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी राजनीतिक दल द्वारा खर्च को प्रतिबंधित या नियंत्रित करता हो। इस प्रकार, स्वामी/भाजपा द्वारा लगाया गया आपराधिक कृत्य का आरोप स्पष्ट रूप से असत्य है।
नेशनल हेराल्ड को दिया गया यह 90 करोड़ ररुपए का ऋण नेशनल हेराल्ड और उसकी मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा चुकाना संभव नहीं था। इसलिए, इस 90 करोड़ रुपए के ऋण को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के इक्विटी शेयरों में परिवर्तित कर दिया गया था। चूंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इक्विटी शेयरों का स्वामित्व अपने पास नहीं रख सकती थी, इसलिए इस इक्विटी को सेक्शन-25 के अंतर्गत स्थापित 'यंग इंडियन', नामक नॉट-फॉर-प्रॉफिट कंपनी को आवंटित कर दिया गया।
राज्यसभा सांसद श्री तनखा ने कहा कि श्रीमती सोनिया गांधी, राहुल गांधी, स्वर्गीय ऑस्कर फर्नांडिस, स्वर्गीय मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे आदि इस 'नॉट-फॉर-प्रॉफिट' कंपनी की प्रबंध समिति के सदस्य हैं। 'नॉट-फॉर-प्रॉफिट' की अवधारणा पर स्थापित किसी भी कंपनी के शेयर धारक/प्रबंध समिति के सदस्य कानूनी रूप से कोई लाभांश, लाभ, वेतन या अन्य वित्तीय लाभ नहीं ले सकते। इसलिए, श्रीमती सोनिया गांधी, राहुल गांधी या 'यंग इंडियन' में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी भी प्राप्ति या वित्तीय लाभ का प्रश्न ही नहीं उठता। इसलिए स्वामी/भाजपा का अवैध प्राप्ति या लाभ या वित्तीय अर्जन का दावा स्वाभाविक रूप से असत्य है।