कारोबारी सावधान! 1 मई से बदल रहा जीएसटी का नियम, 7 दिन के भीतर अपलोड करना होगा इनवॉयस, नहीं तो...

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नई दिल्ली। आगामी 1 मई से कुछ बिजेनेसेज के लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स नियम बदल जाएंगे। जीएसटी नेटवर्क ने कहा है कि अब 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक के टर्नओवर वाले बिजेनेसों को 1 मई से अपने इलेक्ट्रॉनिक चालान को इसके जारी होने के 7 दिन के अंदर इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अपलोड करना होगा। जीएसटी कंप्लायंस का समय पर पालन कराने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है।
जीएसटी के अनुसार, 100 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले सभी कारोबारियों के लिए 1 मई से इस नियम का पालन करना जरूरी होगा। नए नियम के तहत 100 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबार 7 दिन से ज्यादा पुरानी इनवॉयस को अपलोड नहीं कर पाएंगे। इसका मतलब है कि 7 दिन से ज्यादा पुराने ट्रांजेक्शन की रसीद जीएसटी पर अपलोड नहीं हो पाएगी और इस पर रिटर्न भी क्लेम नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, यह नियम सिर्फ इनवॉयस को लेकर है। कारोबारी डेबिट और क्रेडिट नोट्स को 7 दिन बाद भी अपलोड कर सकेंगे।
जीएसटी नियम कहता है कि अगर कोई इनवॉयस जीएसटी पर अपलोड नहीं होता है तो उस पर कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं उठा पाएंगे। जीएसटी किसी उत्पाद के कच्चे माल और फाइनल प्रोडक्ट के बीच के अंतर को वापस पाने के लिए क्लेम किया जाता है। मौजदा समय में कंपनियां कभी भी अपना ई-इनवॉयस अपलोड कर सकती हैं, लेकिन नया नियम लागू होने के बाद उनके पास सिर्फ 7 दिन का समय होगा।
एक्सपर्ट का कहना है कि नया नियम जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने में मददगार होगा। साथ ही कंपनियों को समय पर आईटीसी का लाभ भी मिल जाएगा। इसका मकसद डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना है। सरकार ने हाल में ही 100 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबार या कंपनियों के लिए भी हर ट्रांजेक्शन का जीएसटी इनवॉयस निकालना अनिवार्य कर दिया था।
एक्सपर्ट का कहना है कि अभी इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है और जल्द ही इसे सभी कारोबारियों के लिए अनिवार्य बना दिया जाएगा। मौजूदा समय में 10 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को सभी बी2बी ट्रांजेक्शन का इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस निकालना अनिवार्य बना दिया गया है। सरकार ने 1 अक्टूबर, 2022 से यह नियम लागू किया था। अब आईआरपी पर समय से ई-इनवॉयस अपलोड होने से सरकार और कारोबार दोनों को फायदा होगा। एक तरफ तो जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने में मदद मिलेगी तो दूसरी ओर कारोबारियों को आईटीसी का लाभ भी जल्द मिल सकेगा।